दूरी सिर्फ शहरों की है, दिलों की नहीं

 दूरी सिर्फ शहरों की है, दिलों की नहीं


दूरी सिर्फ शहरों की है, दिलों की नहीं


कहते हैं कि समय बदलता है,
रिश्ते बदलते हैं,
लोग बदल जाते हैं,
और दूरियाँ प्रेम को धीरे-धीरे
यादों की धूल में बदल देती हैं।

शायद यह सच भी हो,
उन लोगों के लिए
जिन्होंने प्रेम को
सिर्फ मुलाक़ातों में देखा है।

पर हमने प्रेम को
धड़कनों में बसाया है।

हमने उसे
सुबह की पहली किरण में महसूस किया है,
रात के आख़िरी तारे में खोजा है,
बरसती बारिश की हर बूँद में सुना है,
और चाँदनी की हर चुप्पी में जिया है।

इसलिए,
हमारे बीच
दूरी सिर्फ शहरों की है,
दिलों की नहीं।

तुम उस शहर में हो,
जहाँ शामें शायद
मेरे शहर से कुछ अलग उतरती होंगी।

वहाँ की गलियाँ
तुम्हारे कदमों की आहट पहचानती होंगी,
पेड़ तुम्हें देखकर मुस्कुराते होंगे,
और हवा तुम्हारा नाम
धीरे-धीरे गुनगुनाती होगी।

मैं इस शहर में हूँ,
जहाँ हर सुबह
तुम्हारी याद
मेरे दरवाज़े पर दस्तक देती है।

चाय की पहली चुस्की के साथ,
तुम्हारी मुस्कान याद आती है।

सूरज की पहली किरण के साथ,
तुम्हारा चेहरा।

और दिन की पहली दुआ में,
सिर्फ तुम्हारा नाम होता है।

लोग पूछते हैं—
क्या इतना दूर रहकर
प्रेम निभाया जा सकता है?

मैं मुस्कुरा देता हूँ।

क्योंकि प्रेम
साथ बैठकर हाथ पकड़ने का नाम नहीं,
बल्कि दूर रहकर
एक-दूसरे की थकान महसूस कर लेने का नाम है।

तुम उदास होती हो,
तो न जाने क्यों
मेरी हँसी भी कहीं खो जाती है।

मैं चुप हो जाता हूँ,
तो तुम्हारे संदेशों में भी
एक अनकही बेचैनी उतर आती है।

यही तो प्रेम है—
जहाँ शब्दों से पहले
दिल बातें करने लगते हैं।

कभी-कभी
रात बहुत लंबी हो जाती है।

मोबाइल की स्क्रीन पर
तुम्हारा चेहरा मुस्कुराता है,
पर उँगलियाँ
तुम्हारे चेहरे को छू नहीं पातीं।

आँखें तुम्हें देखती हैं,
पर बाँहें
तुम्हें बाँध नहीं पातीं।

आवाज़ सुनाई देती है,
लेकिन धड़कनें
एक-दूसरे के सीने से नहीं लग पातीं।

तब लगता है,
दूरी सचमुच कठिन है।

लेकिन अगले ही पल
तुम्हारी हँसी
हर शिकायत को
प्यार में बदल देती है।

बारिश आती है,
तो मैं खिड़की खोल देता हूँ।

एक बूँद हथेली पर गिरती है।

मैं उससे पूछता हूँ—
"क्या तुम उसके शहर से आई हो?"

हवा चलती है,
तो लगता है,
शायद उसने तुम्हारे बालों को छूकर
मुझे भी छुआ है।

चाँद निकलता है,
तो मैं उसे देर तक देखता हूँ।

सोचता हूँ,
यही चाँद
इस समय तुम्हारी खिड़की पर भी होगा।

शायद तुम भी
उसे देखकर
मुझे याद कर रही होगी।

और अगर ऐसा है,
तो समझो
आज हमारी मुलाक़ात
आसमान ने करवा दी।

तुम्हारी भेजी हुई तस्वीरें
मेरी किताबों में
गुलाब की सूखी पंखुड़ियों की तरह रखी हैं।

उनमें अब भी
तुम्हारी मुस्कान की महक है।

तुम्हारे संदेश
मेरे लिए
कविताओं से कम नहीं।

जब भी पढ़ता हूँ,
हर शब्द
दिल के किसी कोने में
एक नया दीपक जला देता है।

तुमने कभी कहा था—

"इंतज़ार कठिन होता है।"

मैंने जवाब दिया था—

"हाँ,
लेकिन सच्चा प्रेम
इंतज़ार से और सुंदर हो जाता है।"

देखो,
हम आज भी
उसी वादे पर टिके हैं।

न तुम बदली,
न मैं।

बस कैलेंडर के पन्ने बदलते गए।

मौसम आते रहे,
मौसम जाते रहे।

गर्मी ने तपाया,
बरसात ने भिगोया,
पतझड़ ने पत्ते गिराए,
बसंत ने फूल खिलाए।

लेकिन हमारा प्रेम
हर मौसम से होकर गुज़रा,
और हर बार
पहले से अधिक हरा हो गया।

कभी-कभी
मैं भविष्य की कल्पना करता हूँ।

एक छोटा-सा घर।

आँगन में तुलसी।

बरामदे में दो कुर्सियाँ।

शाम की चाय।

तुम्हारी हँसी।

मेरी कविताएँ।

और बीच में
एक लंबी चुप्पी,
जो किसी शब्द की मोहताज न हो।

उस दिन
शायद मैं कहूँगा—

"देखो,
इन शहरों ने
हमें रोका ज़रूर,
हराया कभी नहीं।"

क्योंकि
दूरी का काम
सिर्फ रास्ते लंबे करना है,
रिश्ते नहीं।

रिश्ते तो
भरोसे से बनते हैं।

और हमारा भरोसा
किसी पर्वत से कम नहीं।

कभी यदि
जीवन की राहों में
और कठिन मोड़ आएँ,
तब भी
मैं तुम्हारा हाथ
अपने विश्वास में थामे रखूँगा।

यदि दुनिया
हमें अलग दिशाओं में भेज दे,
तब भी
मेरी हर दिशा
तुम्हारी ओर ही जाएगी।

यदि समय
हमारी परीक्षा ले,
तो हम मुस्कुराकर कहेंगे—

"प्रेम हारना नहीं जानता।"

मैंने तुम्हें
सिर्फ चाहा नहीं,
जीया है।

तुम्हें
सिर्फ देखा नहीं,
अपनी हर प्रार्थना में बसाया है।

तुम
मेरे जीवन का वह गीत हो,
जो कभी पुराना नहीं होता।

वह दीप हो,
जो आँधियों में भी
जलना नहीं भूलता।

वह नदी हो,
जो हर मोड़ पर
समुद्र तक पहुँचने का विश्वास रखती है।

और मैं—

मैं उस किनारे की तरह हूँ,
जो हर लहर का
धैर्य से इंतज़ार करता है।

एक दिन
यह इंतज़ार भी समाप्त होगा।

रेल की सीटी बजेगी।

स्टेशन पर भीड़ होगी।

घड़ी अपनी रफ़्तार से चल रही होगी।

लेकिन उस भीड़ में
जब तुम सामने आओगी,
तो समय ठहर जाएगा।

तुम्हारी आँखों में
बरसों का इंतज़ार होगा।

मेरी पलकों पर
अनगिनत सपनों की नमी।

हम शायद
कुछ पल तक
कुछ कह भी न पाएँ।

क्योंकि
कुछ प्रेम
शब्दों से नहीं,
आँखों से पूरे होते हैं।

उस दिन
मैं बस इतना कहूँगा—

"तुम कभी दूर थीं ही नहीं।"

क्योंकि
जिसे दिल में जगह मिल जाती है,
उसे दुनिया का कोई नक्शा
दूर नहीं कर सकता।

मीलों का फ़ासला
धड़कनों को नहीं बाँट सकता।

शहर बदल सकते हैं,
पते बदल सकते हैं,
रास्ते बदल सकते हैं,
मौसम बदल सकते हैं,
लेकिन
यदि प्रेम सच्चा हो,
तो आत्माएँ
एक-दूसरे तक पहुँचने का रास्ता
हर बार खोज लेती हैं।

यही तो हमारी कहानी है।

यह कहानी
मुलाक़ातों की नहीं,
विश्वास की है।

यह कहानी
हाथों की नहीं,
दिलों की है।

यह कहानी
पास रहने की नहीं,
हर पल साथ महसूस करने की है।

और जब कभी
कोई प्रेम की परिभाषा पूछेगा,
मैं मुस्कुराकर
सिर्फ इतना कहूँगा—


दूरी सिर्फ शहरों की है, दिलों की नहीं


"प्रेम वह है, जहाँ दूरी सिर्फ शहरों की होती है… दिलों की नहीं।"

यही प्रेम
हमारी साँसों में बसता रहे,
यही विश्वास
हमारे दिनों को रोशन करता रहे,
और यही इंतज़ार
एक दिन मिलन का सबसे सुंदर उत्सव बन जाए।

क्योंकि सच्चा प्रेम
समय से बड़ा होता है,
दूरी से गहरा होता है,
और भाग्य से भी अधिक अडिग होता है।

दूरी सिर्फ शहरों की है…
दिलों की नहीं।
❤️

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